Jain Muni
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Wednesday, July 22nd, 2009भक्तामर जी Bookmark It Hide Sites
गुप्तिसागर दोहावली
Wednesday, July 22nd, 2009नवीन नग्न जब हो गए, तजा गृहस्थ का वेश चरण वंदना कर रहा तब से सारा देश महाकवि और दार्शनिक, धीर-वीर-गंभीर गुप्तिसागर मुनिराज हैं, नवयुग के महावीर सागर सम गंभीरता, जीवन खुली किताब गुप्तिसागर महाराज का कोई नहीं जवाब राष्ट्रवाद की आप हैं जलती हुई मशाल धन्य-धन्य माँ भारती, जाना आप सा लाल हमने [...]
जैन धर्मानुयायियों मे प्रचलित जातियां / उपजातियां / गोत्रावलियां भाग-2
Wednesday, July 22nd, 2009भाग-2 6) परवार:- परवार मुख्यत: दिगम्बर जैन हैं और व्यावहारिक तौर पर कोई भी श्वेताम्बर परवार नहीं है। वे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मालवा, बिहार, और मुम्बई में फैले हुए हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में उनकी लगभग आधी से भी अधिक जनसंख्या रहती है। मध्यप्रदेश में भी वेसागर, दमोह और जबलपूर जिलों में अधिक रहते [...]
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